Captcha Typing Work at Home – Captcha Reward App

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नमस्कार दोस्तों आज हम फिर से आपके लिए एक बहुत ही बढ़िया ऑनलाइन कमाई वाला एप्लीकेशन लेकर आए हैं जिसमें आप ऑनलाइन वीडियो देखकर, ऐप इंस्टॉल करके और भी छोटे-छोटे टास कंप्लीट करके कमाई कर सकते हो.

तो चलिए शुरू करते हैं और इस एप्लीकेशन के बारे में आपको डिटेल में जानकारी देते हैं बस आपको इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना है और अगर अच्छा लगा तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करना है 

step 1:- सबसे पहले आपको इस आर्टिकल के नीचे जाना है जहां पर एक 60 सेकंड का टाइमर आपको चलता हुआ दिखेगा उसे खत्म होने तक आप को रोकना है जैसे ही टाइमर खत्म हो जाएगा आपके सामने एक डाउनलोड का बटन आएगा उसके ऊपर क्लिक करके आपको इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करना है और ओपन करना है 

Step 2:- जब आप इस एप्लीकेशन को पहली बार ओपन करते हो तो आपको यहां पर साइन अप करने को कहा जाता है तो आप अपनी जीमेल आईडी के को यहां पर साइन अप कर सकते हो

step 3:- उसके बाद आपको यहां पर रेफरल कोड मांगा जाएगा तो हम आपको नीचे एक रेफर कोड दे रहे हैं उसे ही आपको कॉपी करके यहां पर डालना है ताकि आपको 400 कॉइन यहां फ्री में मिल जाए 

Refar Code:- S31606W

Step 4:- जैसे कि आप देख सकते हैं अब हमारे सामने मैंने इंटरफ़ेस ओपन हो चुका है और उसके अंदर सारे कमाई के ऑप्शन भी खुल चुके हैं तो चलिए शुरू करते हैं और इनमें जितने भी कमाई के ऑप्शन है उसे आपको एक-एक करके एक्सप्लेन करते हैं

Step 5:-यहां से सबसे पहले आप वीडियो देखकर पैसे कमा सकते हो यहां पर आपको पांच वीडियो मिलेंगे उन्हें आप एक के बाद एक देख सकते हो और उसके बदले में आपको कॉइन की कमाई यहां पर होने वाली है 

Step 6:- जैसे कि आप नीचे की इमेज में देख सकते हो यहां पर आपको बहुत बड़े-बड़े प्लेटफार्म मिल जाते हैं जिनके अंदर आप सर्वे फील कर सकते हो और ज्यादा से ज्यादा कॉइन की कमाई कर सकते हो 

Step 7:- यहां पर आप अलग-अलग एप्लीकेशन को इंस्टॉल कर के भी कमाई कर सकते हो जैसे कि आप नीचे की स्क्रीन पर देख पा रहे हो यहां पर हमें तीन एप्लीकेशन में रहे हैं जिन्हें आप इंस्टॉल करके कॉइन कमा सकते हो 

Step 8:- यहां से कमाई करने का जो आखिरी तरीका है वह रेफरल का अगर आपके link से कोई इस ऐप को डाउनलोड करता है और दो एप्लीकेशन को इंस्टॉल करता है जो कि आपको task के अंदर मिलेंगे तो आपको 400 पॉइंट फ्री में मिलते हैं 

जैसे कि आप नीचे की स्क्रीन पर देख रहे हो यहां पर आपको दो पेमेंट के ऑप्शन मिलते हैं Paytm or Paypal जैन के जरिए आप पेमेंट ले सकते हो 

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हेलो गाइज, मै Twinkle और में इस ब्लॉग की ओनर हु, और पिछले 3 सालोसे डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉगिंग पर काम कर रही हु। और यहाँ पे ये भी आशा करती हु की आपको हमारे ब्लॉग का कॉन्टेंट पसंद आ रहा है।

98 thoughts on “Captcha Typing Work at Home – Captcha Reward App”

  1. Happy Navratri 2022
    माँ कालरात्रि
    नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि

    Reply
  2. आज आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और रविवार का दिन है

    आज मां कालरात्रि का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए

    इन मंत्रों का जाप करने से आपके सभी दुःख दूर होंगे

    Reply
  3. आज आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और रविवार का दिन है। सप्तमी तिथि आज शाम 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। लेकिन नवरात्र का पर्व उदया तिथि में मनाया जाता है, लिहाजा आज नवरात्र का सातवां दिन है। नवरात्र के दौरान पड़ने वाली सप्तमी को महासप्तमी के नाम से जाना जाता है। आज के दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जायेगी। आपको बता दूं कि जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब उन्हें कालरात्रि के नाम से जाना गया।

    Reply
  4. मंत्र है-

    जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।

    जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥

    Reply
  5. ॐ कालरात्र्यै नम:।

    आज के दिन स्नान आदि के बाद लाल रंग के कपड़े पहनकर, लाल रंग के ही आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के सामने एक घी का दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं। फिर देवी मां को लौंग चढ़ाएं और पेड़े का भोग लगाएं। इसके बाद देवी कालरात्रि के इस मंत्र का 11 माला जाप कीजिये। आज के दिन ऐसा करने से शत्रुओं से भी छुटकारा मिलेगा। एक माला में 108 दाने होते हैं। मंत्र है –

    Reply
  6. ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ

    आज के दिन आप नवरात्रि की सामान्य पूजा के बाद देवी कालरात्रि को प्रणाम करके, आसन पर बैठकर उनके इस मंत्र का जाप करें। इस प्रकार दो माला, यानी 216 मंत्रों का जाप करके देवी मां को गुड़ का भोग लगाएं और उनका आशीर्वाद लें। आज के दिन ये उपाय करने से आपके जीवन में दरिद्रता कभी अपना स्थान नहीं बना पाएगी।

    Reply
  7. ॐ यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि।।
    संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमापदः ॐ।

    आज के दिन सुबह स्नान आदि के बाद नवरात्र की पूजा करके देवी कालरात्रि की उचित प्रकार से पूजा करनी चाहिए। उसके बाद देवी के नवार्ण मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। आज के दिन इस मंत्र का जाप करने से आपके घर की हर प्रकार से, हर बुरी नजर से सुरक्षा होगी

    Reply
  8. ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे:।

    आज के दिन देवी कालरात्रि के सामने गुग्गुल की धूप दिखाने के बाद पूरे घर में भी धूप दिखाएं। साथ ही उनके इस मंत्र का 108 बार जाप करें। आज के दिन ऐसा करने से आपके विरोधी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पायेंगे। मंत्र है-
    ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या खिलेश्वरी।
    एवमेव त्वया कार्य अस्मद् वैरी विनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।

    Reply
  9. आज के दिन सुबह स्नान आदि के बाद लाल रंग के आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। आज के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप करने के बाद मां कालरात्रि को जीरे का भोग लगाएं। इससे आपका जीवन खुशहाल रहेगा। मंत्र इस प्रकार है –
    ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।’

    Reply
  10. आज के दिन आप देवी कालरात्रि को प्रणाम करके उनकी तस्वीर के सामने बैठकर उनके इस मंत्र का 108 बार जाप करें। इस मंत्र का जाप करने के बाद देवी मां को एक कपूर और 6 लौंग की आहुति दें। ऐसा करने से आपको बिजनेस में कभी नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा। मंत्र इस प्रकार है-

    एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
    वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

    Reply
  11. आज के दिन एक मिट्टी की दीया में दो कपूर की टिकिया जलाकर देवी कालरात्रि के सामने रखें और उनके इस मंत्र का जाप करें। जाप करने के बाद धूप को दोनों हाथों से लेकर अपनी आंखों पर लगाएं। आज के दिन ऐसा करने से आपका हर काम सिद्ध होगा।

    ॐ ऐं यश्चमर्त्य: स्तवैरेभि: त्वां स्तोष्यत्यमलानने
    तस्य वि‍त्तीर्द्धविभवै: धनदारादि समप्दाम् ऐं ॐ।

    Reply
  12. TODAY 2 अक्टूबर 2022
    आज नवरात्रि के सातवें दिन
    माँ कालरात्रि की जय

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  13. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य
    गुवाहाटी के 7 खूबसूरत प्रसिद्ध मंदिर आपको अवश्य दर्शन करने चाहिए

    Reply
  14. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    गुवाहाटी असम राज्य का सबसे बड़ा शहर है और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे बड़ा महानगरीय शहर भी है। दिसपुर असम राज्य की राजधानी है, गुवाहाटी के भीतर स्थित है। गुवाहाटी के पर्यटन स्थल अपनी सुंदरता और इतिहास के लिए जाने जाते हैं। गुवाहाटी की दो प्रमुख सड़कें G.S Road और R.G Baruah Road हैं, जो कई मॉल, रेस्तरां और थिएटर बनाती हैं, इस प्रकार इस बढ़ते कॉस्मोपॉलिटन में प्रमुख मनोरंजन और शॉपिंग सेंटर बन जाते हैं। यहां का सबसे प्रसिद्ध त्योहार बोहाग बिहू है, जो असमिया नए साल की शुरुआत का प्रतीक है और अप्रैल के मध्य में आता है। एक अन्य प्रमुख त्योहार दुर्गा पूजा है जो अक्टूबर में मनाया जाता है। यहां कुछ खूबसूरत प्रसिद्ध मंदिर हैं,

    Reply
  15. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    गुवाहाटी घूमने के लिए अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है क्योंकि शहर में आर्द्र जलवायु होती है। कोई भी अप्रैल के दौरान बिहू त्योहारों के आसपास अपनी यात्रा की योजना बना सकता है। यहां पर हम आपको गुवाहाटी के प्रसिद्ध मंदिर के यात्रा की पूरी जानकारी देने जा रहें हैं। अगर आप गुवाहाटी घूमने जा रहे हैं, तो आपको नीचे दिए गए 7 मंदिर की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।

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  16. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    1.उमानंद मंदिर

    उमानंद मंदिर एक शिव मंदिर है जो ब्रह्मपुत्र नदी के उमानंद द्वीप पर स्थित है। ‘उमानंद’ नाम दो हिंदी शब्दों ‘उमा’ से आया है, जो भगवान शिव की पत्नी है और दूसरा नाम ‘आनंद’ है। उमानंद द्वीप को भारत के सबसे छोटे द्वीपों में से एक के रूप में भी जाना जाता है। इसका निर्माण 1694 AD में किया गया था। यह राजा गदाधर सिन्हा के आदेश के तहत किया गया था, लेकिन 1867 में भूकंप से टूट गया था। उमानंद मंदिर में सूर्य, गणेश, शिव और देवी की मूर्तियां और विष्णु के दस अवतार पाए जाते हैं।

    इस मंदिर में महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है। चूंकि मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए यहां त्योहार का बहुत महत्व है। सभी भक्त इस अवसर पर देवी की पूजा करने के लिए मंदिर में आते हैं। उमानंद द्वीप गुवाहाटी और उत्तरी गुवाहाटी से नौका और स्टीमर द्वारा पहुँचा जा सकता है। एक सुकलेश्वर घाट या फैंसी बाजार घाट से नौका किराए पर ले सकता है। जिस पर्वत पर मंदिर बना है उसे भस्माकला के नाम से जाना जाता है।

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  17. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    आगंतुक सूचना

    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    समय: सुबह 05:30 से शाम 06:00 बजे तक
    अवधि: 2-3 घंटे।

    Reply
  18. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    2.कामाख्या मंदिर

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  19. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर गुवाहाटी शहर के पश्चिमी भाग में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है। कामाख्या मंदिर के मुख्य द्वार को सरल सुंदर नक्काशी के साथ रंगीन फूलों से सजाया गया है। अंबुबाची मेला इस मंदिर का मुख्य वार्षिक उत्सव है जब दुनिया भर के हजारों पर्यटक इस कार्यक्रम का गवाह बनते हैं।

    Reply
  20. कामाख्या मंदिर की वर्तमान संरचना को नीलाचंद प्रकार का कहा जाता है, जो एक अर्धगोलाकार गुंबद और एक क्रॉस-आकार के आधार के साथ वास्तुकला के लिए एक और शब्द है। कामाख्या मंदिर देश के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। कामाख्या मंदिर तक पहुंचने के लिए आप गुवाहाटी के किसी भी हिस्से से ऑटो रिक्शा या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। असम पर्यटन विभाग की नियमित बसें शहर के विभिन्न हिस्सों से मंदिर के लिए चलती हैं।

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  21. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    आगंतुक सूचना

    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    विशेष प्रवेश – INR 101
    सीधे प्रवेश – INR 501
    समय: सुबह 08:00 से दोपहर 01:00 बजे और दोपहर 02:30 से 05:30 बजे तक
    अवधि: 2-3 घंटे।

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  22. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    3.इस्कॉन मंदिर

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  23. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    इस्कॉन मंदिर मूल संगठन के तहत मंदिरों में से एक है जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। यह उलुबारी चरियाली क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस्कॉन गुवाहाटी हरे भरे बगीचों से घिरा हुआ है जहाँ भक्त अपना समय भगवान की भक्ति में बिता सकते हैं। मंदिर के अंदरूनी हिस्सों में आकर्षक पोशाक में कृष्ण और रुक्मणी की मूर्ति शामिल है। वैष्णववाद पर आधारित समाज की शिक्षाओं के प्रचार के लिए मंदिर के अंदर विभिन्न हॉल हैं, जो भगवान विष्णु को अपनी सर्वोच्च शक्ति मानते हैं।

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  24. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    ऐसी कई गतिविधियाँ हैं जिनमें इस्कॉन के भक्त शामिल होते हैं। कृष्ण मंत्र का जाप मंदिर में एक दैनिक अभ्यास है। और मंदिर में दैनिक दिनचर्या में सुबह और शाम को आरती, गीता प्रवचन, भजन शामिल हैं। इस्कॉन समाज के तहत जीवन मुख्य रूप से “हरे कृष्ण मंत्र” पर आधारित है। मंदिर परिसर के अंदर विभिन्न सत्र हैं जो इस्कॉन समाज की मान्यताओं के आधार पर जीवन के पाठों का उपदेश देते हैं। मंदिर गुवाहाटी से 2 किमी दूर स्थित है, आप शहर से मंदिर तक ऑटो-रिक्शा ले सकते हैं।

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  25. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    आगंतुक सूचना

    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    समय: सुबह 08:00 से शाम 07:00 बजे तक
    अवधि: 1-2 घंटे।

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  26. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    4.वशिष्ठ आश्रम

    Reply
  27. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    वशिष्ठ मंदिर को रामायण के हिंदू महाकाव्य को लिखने का श्रेय दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऋषि ने इस आश्रम का निर्माण किया और बाद में यहीं पर अंतिम सांस ली। स्थानीय लोगों के अनुसार इस आश्रम का निर्माण स्वयं ऋषि ने किया था और वे अपने अंतिम दिनों में यहीं रहते थे। इस जगह का मंत्रमुग्ध कर देने वाला माहौल और अनूठी वास्तुकला देखने लायक है। आश्रम में एक मंदिर है लेकिन फिर भी वह गुफा जहां मुनि वशिष्ठ ने तपस्या की थी, आश्रम के भीतर 5 किमी दूर स्थित है।

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  28. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    आगंतुक सूचना

    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    समय: सुबह 06:00 से शाम 08:00 बजे तक
    अवधि: 1-2 घंटे।

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  29. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    5.सुकरेश्वर मंदिर

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  30. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    सुकरेश्वर मंदिर असम राज्य का एक शिव मंदिर है। यह मंदिर गुवाहाटी शहर के पानबाजार इलाके में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर सुकरेश्वर पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर का निर्माण 1744 में अहोम राजा प्रमत्त सिंघा ने करवाया था, और 1759 में राजेश्वर सिंह द्वारा वित्तीय परिवर्तन किए गए थे। सुकरेश्वर घाट की सीढ़ियों पर बैठकर, नदी पर डूबते सूरज, नदी के उस पार नावों, सम्मान में पूजा करने वाले लोगों के दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।

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  31. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    मंदिर मुख्य रूप से अपने मृत्यु के बाद के अनुष्ठानों के लिए लोकप्रिय है। यह एक आम धारणा है कि यहां ये अनुष्ठान मृतकों को शांति या ‘मोक्ष’ प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। मंदिर में भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जिसे छठा ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है। सुकरेश्वर मंदिर में मुख्य त्योहार महाशिवरात्रि है जो बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। सुकरेश्वर मंदिर तक पहुँचने के लिए आप गुवाहाटी शहर में कहीं से भी असम राज्य की बस, टैक्सी या कैब ले सकते हैं।

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  32. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    आगंतुक सूचना

    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, नदी, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    समय: सुबह 06:00 से शाम 07:00 बजे तक
    अवधि: 2-3 घंटे।

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  33. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    6.नवग्रह मंदिर

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  34. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    नवग्रह मंदिर नौ खगोलीय पिंडों को समर्पित एक प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर है। सबसे शक्तिशाली खगोलीय पिंड सूर्य का निवास माना जाता है, मंदिर में ग्रहों के देवताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले रंगीन कपड़ों में नौ शिवलिंग हैं। मंदिर 18 वीं शताब्दी के अंत में राजा राजेश्वर सिंह द्वारा बनाया गया था, नवग्रह मंदिर को बड़े भूकंपों से बचने के लिए जाना जाता है। आदरणीय मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है और इसमें प्रति दिन भक्तों का कतार लगा रहता है।

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  35. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    नवग्रह मंदिर में सिलपुखुरी तालाब 1753 में, राजा राजेश्वर सिंह ने मंदिर परिसर में एक पानी की टंकी का निर्माण किया ताकि मंदिर जाने वालों और पुजारियों को पानी की बारहमासी आपूर्ति की जा सके। इस टंकी का नाम ‘सिलपुखुरी’ रखा गया था और आज तक यह जरूरतमंदों को पानी उपलब्ध कराती है। नवग्रह मंदिर तक पहुंचने के लिए आप सेनिकुथी बस स्टॉप तक सार्वजनिक बस ले सकते हैं।

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  36. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

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    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    समय: सुबह 05:00 से शाम 06:00 बजे तक
    अवधि: 1-2 घंटे।

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  37. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    7.भुवनेश्वरी मंदिर

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  38. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    भुवनेश्वरी मंदिर देवी भुवनेश्वरी को समर्पित है, शहर से सटी एक पहाड़ी के ऊपर स्थित यह सफेद मंदिर धार्मिक तीर्थयात्रियों के बीच एक प्रमुख आकर्षण है। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ियों की चोटी पर स्थित है, जो शहर के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर से थोड़ा ऊंचा है। शाम के समय ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य इस स्थान की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। मंदिर आगंतुकों को गुवाहाटी शहर का शानदार मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। भुवनेश्वरी मंदिर तक पहुँचने के लिए, नीचे बस स्टैंड से 20 मिनट की पैदल दूरी की आवश्यकता है।

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  39. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    आगंतुक सूचना

    प्रसिद्ध: मंदिर, प्रकृति, तीर्थयात्रा।
    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं
    समय: सुबह 06:00 से शाम 05:00 बजे तक
    अवधि: 1-2 घंटे।

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  40. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    गुवाहाटी कैसे पहुंचे

    ट्रेन से गुवाहाटी कैसे पहुंचे

    अगर आपने गुवाहाटी जाने के लिए ट्रेन को चुना है तो आपको बता दें कि गुवाहाटी शहर के दो प्रमुख रेलवे स्टेशन कामाख्या रेलवे स्टेशन और गुवाहाटी रेलवे स्टेशन हैं। यह सुपरफास्ट ट्रेनों द्वारा भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों जैसे नई दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हावड़ा, इलाहाबाद, से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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  41. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    बस से गुवाहाटी कैसे पहुंचे

    अगर आपने गुवाहाटी जाने के लिए बस का चुनाव किया है तो आपको बता दें कि गुवाहाटी राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क के माध्यम से नजदीकी शहरों और राज्यों के लिए बस सेवा के माध्यम से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। तीन बस टर्मिनल – अदाबारी, पलटन बाजार और आईएसबीटी गुवाहाटी, कस्बों को नियमित राज्य और निजी बसें प्रदान करते हैं।

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  42. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    फ्लाइट से गुवाहाटी कैसे पहुंचे

    अगर आपने गुवाहाटी जाने के लिए हवाई मार्ग चुना है, तो आपको बता दें कि गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा गुवाहाटी का मुख्य हवाई अड्डा है। हवाई अड्डा भारत के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डा शहर के केंद्र से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद आप पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए टैक्सी या कैब किराए पर ले सकते हैं।

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  43. Q-गुवाहाटी किसके लिए प्रसिद्ध है?
    A-गुवाहाटी कामाख्या देवी के प्राचीन मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।

    Reply
  44. Q-गुवाहाटी में कौन सी भाषा बोली जाती है?
    A-गुवाहाटी में असमिया, बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी बोली जाती है। असमिया राज्य की प्रमुख भाषा है

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  45. डिब्रूगढ़ के इन पर्यटन स्थल में जरूर घूमे, यह असम का खूबसूरत शहर में से एक है

    Dibrugarh देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक है और यह ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित है। डिब्रूगढ़ को भारत के “चाय शहर” के रूप में भी जाना जाता है। यह शहर नदियों, चाय के बागानों और हरियाली क्षेत्रों सहित विभिन्न प्राकृतिक आकर्षणों से भरा हुआ है। आप यहां ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, शिविर और कई साहसिक खेलों का आनंद ले सकते हैं। डिब्रूगढ़ भारत में एक पर्यटन स्थल है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है।

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  46. डिब्रूगढ़ का इतिहास अहोम साम्राज्य के इतिहास से जुड़ा हुआ है क्योंकि अहोम शासकों का शासन बहुत महत्वपूर्ण था और डिब्रूगढ़ भी उनके द्वारा शासित था। यह खूबसूरत शहर तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और शिवसागर के तीन चाय उत्पादक जिलों का प्रवेश द्वार है। इन तीन क्षेत्रों में भारत की असम की लगभग 50% चाय की फसल है। तेल और लकड़ी डिब्रूगढ़ और उसके आसपास के अन्य दो बड़े उद्योग हैं। बोगीबिल ब्रिज, जो भारत का सबसे लंबा ट्रेन-कम-रोड ब्रिज है, डिब्रूगढ़ से 15 किमी की दूरी पर स्थित है।

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  47. डिब्रूगढ़ में घूमने की जगहें

    1. डिब्रू सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान

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  48. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    डिब्रू सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान असम में एक राष्ट्रीय उद्यान है, जो डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में स्थित है। इसे जुलाई 1997 में 765 sq. km के क्षेत्र के साथ बायोस्फीयर रिजर्व नामित किया गया था, जिसमें 340 sq. km का मुख्य क्षेत्र भी शामिल था। पार्क उत्तर में ब्रह्मपुत्र और लोहित नदियों और दक्षिण में डिब्रू नदी से घिरा है। इस राष्ट्रीय उद्यान में कई सुगंधित और औषधीय पौधे भी पाए जाते हैं। पार्क में एक तालाब भी है, जहाँ पर्यटक नौका विहार का आनंद ले सकते हैं। प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए यह उद्यान बहुत अच्छी जगह है।

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  49. उनके प्राकृतिक आवास में देखे जाने वाले जानवरों के जीवन में रॉयल बंगाल टाइगर, हूलॉक गिबन्स और तेंदुए शामिल हैं, यह कुछ प्रतिबंधित-श्रेणी की प्रजातियों का घर भी है, जैसे कि व्हाइट-विंग्ड वुड डक, बंगाल फ्लोरिकन, लेसर एडहुटेंट स्टॉर्क, आदि। पार्क में घूमने के लिए कोई सड़क और जंगल सफारी या हाथी की सवारी नहीं है, इसलिए आप केवल ट्रेकिंग करके पार्क का पता लगा सकते हैं, हालांकि एक नाव सेवा उपलब्ध है जो आपको विभिन्न स्थानों पर ले जा सकती है। गुइजन घाट और साइखोवा घाट राष्ट्रीय उद्यान के प्रवेश बिंदु हैं

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  50. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    2. जगन्नाथ मंदिर

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  51. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    डिब्रूगढ़ का श्री जगन्नाथ मंदिर ओडीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति है। खानिकार में महात्मा गांधी पार्क के पास स्थित, इस मंदिर को शिक्षाक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। और यह डिब्रूगढ़ शहर से 5 km की दूरी पर है। इस मंदिर की यात्रा करने का लिया पुरे साल ही अच्छा समय है। फिर भी, लोग कम तापमान के कारण सर्दियों के मौसम में घूमना पसंद करते हैं। आप किसी भी स्थानीय परिवहन से पहुंच सकते हैं।

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  52. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    डिब्रूगढ़ शहर में कई अन्य मंदिर हैं। रैडोंगिया डोल शहर के प्रमुख मंदिरों में से एक है और इसकी दीवार पर 24 मूर्तियाँ हैं, जिनमें से केवल 14 को ही आज भी देखा जा सकता है। प्रतिमाएं लगभग 45 फीट ऊंची हैं। इस मंदिर की स्थापना स्वारगोडो प्रमत्त सिंहा ने 700 AD में की थी।

    प्रवेश शुल्क: कोई प्रवेश शुल्क नहीं।
    समय: सुबह 8:00 से शाम 7:00 तक

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  53. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    3.नहरकटिया टी गार्डन

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  54. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    नहरकटिया शहर असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित है। यह अपने पेट्रोलियम और गैस भंडार के लिए अच्छी तरह से जाना जाता है। इससे पहले, ऑयल इंडिया लिमिटेड का अपने सर्कल में दुलियाजान शहर में प्रधान कार्यालय था। आपको बता दें कि यह जिले का एक व्यावसायिक शहर है, जिसमें कई गांव और चाय के बागान हैं। शहर आज एक पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय हो गया है और बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखने आते हैं। आप शहर के समीपवर्ती क्षेत्र में स्थित नामपहाके, सासोनी गोजपुरिया, मेरिल इको-टूरिज्म और गोभूरो डोलोंग सहित खूबसूरत गांवों की यात्रा कर सकते हैं।

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  55. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    यदि आपने अपने जीवनकाल में कम से कम एक कप चाय पी है, तो नहरकटिया “जानते हैं कि वे इसे कैसे बनाते हैं?” आपके लिए अनुभव की तरह। डिब्रूगढ़ जिले में एक वाणिज्यिक शहर, इस जगह में कई चाय बागान और गाँव हैं। यदि आप दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान नहरकटिया शहर का दौरा कर रहे हैं। तब आपको उस भव्य तरीके का अनुभव होगा, जिस अवसर को यहाँ मनाया जाता है। शहर रोशनी से जगमगाता है और पूजा के अंतिम दिन जुलूस निकाला जाता है।अगर आप डिब्रूगढ़ घूमने जा रहे हैं, तो आप एक बार नहरकटिया चाय बागान जरूर जाएं। नहरकटिया टी गार्डन सबसे सुन्दर डिब्रूगढ़ के पर्यटन स्थल मै से एक है।

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  56. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    4. राधा कृष्ण मंदिर

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  57. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    राधा कृष्ण मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो जालान नगर में स्थित सुंदर हरे बागों से घिरा है। यदि आप कुछ आध्यात्मिक शांति पाने की आशा कर रहे हैं, तो राधा कृष्ण मंदिर वह जगह है जहाँ आपको अवश्य जाना चाहिए। इस जगह की शांति आपके मन को सुकून देगी। मंदिर की अनूठी और परिभाषित स्थापत्य शैली उन कारणों में एक कारण है जो लोग यहां समय बिताना पसंद करते हैं।

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  58. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    राधा कृष्ण मंदिर के अलावा, अन्य आध्यात्मिक धब्बे हैं जो डिब्रूगढ़ में आप यात्रा कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: काली ऐ थान और क्षत्रप जैसे देहिंग नमट्टी सातरा, गरपारा सातरा और देहिंग सातरा। यह मंदिर डिब्रूगढ़ असम मेडिकल कॉलेज के पास स्थित है, जो डिब्रूगढ़ में एक प्रमुख स्थान है, रिक्शा या टैक्सी जैसे परिवहन का कोई भी स्थानीय मोड आपको यहाँ छोड़ देगा।

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  59. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    5. निंबाहेके गांव

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  60. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    निंबाहेके गांव डिब्रूगढ़ से लगभग 37 km की दूरी पर स्थित है। गाँव कई ताई फेक परिवारों का घर है जो यहाँ रहते हैं। इस गाँव में नामफेक मोनेस्टी है जो एक सुंदर बौद्ध मठ है। नमफेक मोनिटी के आसपास का शांत और प्राकृतिक सौंदर्य इसे बेहद खास बनाता है। यहां रहने वाले लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और उनकी मान्यताएं और परंपराएं इस धर्म के बारे में काफी मजबूत हैं। यदि आप डिब्रूगढ़ की यात्रा कर रहे हैं, तो आप इस स्थान को मिस ना करे।

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  61. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    मुख्य मंदिर में सोने से बनी भगवान बुद्ध की एक मूर्ति और मुसुलिंदा टैंक नामक एक पवित्र जल कुंड भी है। मठ में एक महत्वपूर्ण स्थान अशोकन स्तंभ और बौद्ध शिवालय है। मुख्य मठ में प्रवेश करने पर, पर्यटक यहां सोने से बनी भगवान बुद्ध की मूर्ति देख सकते हैं। अक्टूबर से मार्च तक घूमने का सबसे अच्छा समय है क्योंकि आप मार्च में पोई-नेन-ची उत्सव और भगवान बुद्ध को समर्पित पोई-नन-होक सहित कई त्योहारों का आनंद ले सकते हैं।

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  62. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    6. देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य

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  63. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य डिब्रूगढ़ में और आंशिक रूप से तिनसुकिया जिले में स्थित है। यह असाम में एकमात्र वर्षावन है। यह अभयारण्य 111.19 sq. km के क्षेत्र को कवर करता है और गीले उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन के अंतर्गत आता है। देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य के तीन भाग हैं जो दिरोक वर्षावन, ऊपरी दीहिंग नदी और जेपोर हैं। देहिंग पटकाई को वर्ष 2004 में एक अभयारण्य का दर्जा मिला। देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को परियोजना हाथी के तहत देहिंग-पटकाई हाथी अभ्यारण्य घोषित किया गया।

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  64. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    देहिंग पटकाई में वर्ष के दौरान 293 पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 174 गनेरा और 51 परिवार होते हैं। इस चार-स्तर वाले वर्षावन के विभिन्न पेड़ ऑर्किड और ब्रोमेली के कई विदेशी प्रजातियों से भरे हुए हैं। पर्यटक यह न केवल जंगली जानवरों बल्कि और भी बहुत कुछ देख सकते हैं। आपको बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान की डिगबोई तेल रिफाइनरी यहाँ के पास स्थित है। यदि आप डिब्रूगढ़ पर्यटन स्थलों की यात्रा करने जा रहे हैं, तो अपनी सूची में देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को जरूर शामिल करें। देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य की यात्रा का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च है। अगर आप फरवरी में आते हैं तो आप देहिंग-पटकाई उत्सव में भी शामिल हो सकते हैं।

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  65. Happy Navratri special ……………………………………………………………………………………..7th day

    असम राज्य

    डिब्रूगढ़ कैसे पहुंचे

    वायुपथ: डिब्रूगढ़ में एक हवाई अड्डा है जो प्रमुख भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह डिब्रूगढ़ टाउन से लगभग 15 किमी दूर मोहनबाड़ी में स्थित है।

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  66. ल मार्ग: डिब्रूगढ़ में दो रेलवे स्टेशन हैं, डिब्रूगढ़ टाउन रेलवे स्टेशन और एक अन्य है जो डिब्रूगढ़ से लगभग 11 किमी दूर बानीपुर में विकसित किया गया है। डिब्रूगढ़ रेलवे नेटवर्क के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण भारतीय शहरों जैसे बैंगलोर, कोलकाता, दिल्ली, कन्याकुमारी आदि से जुड़ा हुआ है।

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  67. Q- डिब्रूगढ़ क्यों प्रसिद्ध है?
    A- डिब्रूगढ़ “टी सिटी ऑफ़ इंडिया” के लिए प्रसिद्ध है। भारत की असम चाय की फसल का लगभग 50% चाय का उत्पादन करता है।

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  68. Q- डिब्रूगढ़ में कौन सी नदी बहती है?
    A- ब्रह्मपुत्र नदी जिले के उत्तरी छोर के माध्यम से 95 किमी की लंबाई के लिए बहती है।

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  69. Q- डिब्रूगढ़ जिला कब बना था?
    A- 1971 में डिब्रूगढ़ सब डिवीजन अपने आप में एक पूर्ण जिला बन गया।

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  70. Q- असम के किस जिले में चाय बागानों की संख्या सबसे अधिक है?
    A- डिब्रूगढ़, 177 उद्यानों के साथ, राज्य में सबसे अधिक चाय सम्पदा है।

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  71. Q- डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी की दूरी?
    A- भारत की सबसे लंबी ट्रेन यात्रा असम के डिब्रूगढ़ से शुरू होती है और तमिलनाडु के कन्याकुमारी में समाप्त होती है। डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस 4,286 किमी की दूरी तय करती है; पांच दिन की यात्रा।

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  72. भारत माता की जय
    वंदे मातरम

    भारत माता की जय
    वंदे मातरम

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  73. उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी
    ‘उसने कहा था’ हिंदी की ऐसी कालजयी कहानी है जिसकी प्रासंगिकता और सार्वकालिकता इसके कथानक पर ही नहीं, इसकी भाषिक संरचनात्मक विशिष्टता पर भी आधारित है.

    ऐसी ‘हिंदी’, जो आज के अकादमिक, सांस्थानिक और राजकीय-राजनीतिक प्रयासों से अपठनीय बना दी गई है और जो साधारण हिंदी भाषियों के लिए दुरुह और अजनबी हो चुकी है.

    वही साहित्यिक ‘हिंदी’ जो हिंदी के नाम पर शिक्षण संस्थानों में प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालयों तक लागू है और जिसमें लाखों हिंदी भाषी बच्चे परीक्षाओं में फ़ेल हो जाते हैं.

    उसी हिंदी के सामने ‘उसने कहा था’ की वो हिंदी जो आज भी इसलिए ताज़ा और समकालीन लगती है क्योंकि वो एक ओर तो जीवित-व्यावहारिक भाषा को रचना का आधार बनाती है और दूसरी ओर वो इस भाषा की व्यंजनाओं को विरल विलक्षण आँख से पकड़ती है.

    कोई भी पाठक, जैसे ही इस कहानी को पढ़ना शुरू करता है वो इसकी विवरणात्मकता और व्यंजना के जादू से बंध कर रह जाता है.

    उदाहरण के लिए इस कहानी का पहला पैरा ही देखिए :

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  74. उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी
    ‘उसने कहा था’ हिंदी की ऐसी कालजयी कहानी है जिसकी प्रासंगिकता और सार्वकालिकता इसके कथानक पर ही नहीं, इसकी भाषिक संरचनात्मक विशिष्टता पर भी आधारित है.
    Uu
    ऐसी ‘हिंदी’, जो आज के अकादमिक, सांस्थानिक और राजकीय-राजनीतिक प्रयासों से अपठनीय बना दी गई है और जो साधारण हिंदी भाषियों के लिए दुरुह और अजनबी हो चुकी है.

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  75. उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी
    ‘उसने कहा था’ हिंदी की ऐसी कालजयी कहानी है जिसकी प्रासंगिकता और सार्वकालिकता इसके कथानक पर ही नहीं, इसकी भाषिक संरचनात्मक विशिष्टता पर भी आधारित है.
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    ऐसी ‘हिंदी’, जो आज के अकादमिक, सांस्थानिक और राजकीय-राजनीतिक प्रयासों से अपठनीय बना दी गई है और जो साधारण हिंदी भाषियों के लिए दुरुह और अजनबी हो चुकी है.

    वही साहित्यिक ‘हिंदी’ जो हिंदी के नाम पर शिक्षण संस्थानों में प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालयों तक लागू है और जिसमें लाखों हिंदी भाषी बच्चे
    njjgfjffi परीक्षाओं में फ़ेल हो जाते हैं.

    उसी हिंदी के सामने ‘उसने कहा था’ की वो हिंदी जो आज भी इसलिए ताज़ा और समकालीन लगती है क्योंकि वो एक ओर तो जीवित-व्यावहारिक भाषा को रचना का आधार बनाती है और दूसरी ओर वो इस भाषा की व्यंजनाओं को विरल विलक्षण आँख से पकड़ती है.

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  78. लाल रंग के कपड़े पहनकर, लाल रंग के ही आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के सामने एक घी का दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं। फिर देवी मां को लौंग चढ़ाएं और पेड़े का भोग लगाएं। इसके बाद देवी कालरात्रि के इस मंत्र का 11 माला जाप कीजिये। आज के दिन ऐसा करने से शत्रुओं से भी छुटकारा मिलेगा। एक माला में 108 दाने होते हैं। मंत्र है –

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  79. लाल रंग के कपड़े पहनकर, लाल रंग के ही आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के सामने एक घी का दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं। फिर देवी मां को लौंग चढ़ाएं और पेड़े का भोग लगाएं। इसके बाद देवी कालरात्रि के इस मंत्र का 11 माला जाप कीजिये। आज के दिन ऐसा करने से शत्रुओं से भी छुटकारा मिलेगा। एक माला में 108 दाने होते हैं। मंत्र है –

    Replyलाल रंग के कपड़े पहनकर, लाल रंग के ही आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के सामने एक घी का दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं। फिर देवी मां को लौंग चढ़ाएं और पेड़े का भोग लगाएं। इसके बाद देवी कालरात्रि के इस मंत्र का 11 माला जाप कीजिये। आज के दिन ऐसा करने से शत्रुओं से भी छुटकारा मिलेगा। एक माला में 108 दाने होते हैं। मंत्र है –

    Replyलाल रंग के कपड़े पहनकर, लाल रंग के ही आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के सामने एक घी का दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं। फिर देवी मां को लौंग चढ़ाएं और पेड़े का भोग लगाएं। इसके बाद देवी कालरात्रि के इस मंत्र का 11 माला जाप कीजिये। आज के दिन ऐसा करने से शत्रुओं से भी छुटकारा मिलेगा। एक माला में 108 दाने होते हैं। मंत्र है –

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  80. TODAY Maha Ashtami
    03 October 2022

    जब भक्त के बुलावे पर तुरंत पहुंची भवानी मां, टूट गया था राजा का घमंड

    मां के भक्त थावे मंदिर में आकर सिंहासिनी भवानी मां के दरबार का आशीर्वाद लेकर खुद को धन्य समझते हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की दयालु मां सभी मनोरथें पूरा करती हैं।

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  81. TODAY Maha Ashtami
    03 October 2022

    बिहार के धार्मिक स्थलों में बिहार के गोपालगंज जिले के थावे स्थित भवानी मंदिर के विषय में मान्यता है कि एक भक्त के बुलावे पर मां भवानी असम के कामाख्या से यहां पहुंची थी। थावे भवानी मंदिर को जाग्रत शक्ति पीठ माना जाता है।

    मां के भक्त थावे मंदिर में आकर सिंहासिनी भवानी मां के दरबार का दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेकर खुद को धन्य समझते हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की दयालु मां सभी मनोरथें पूरा करती हैं।

    गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर सिवान जाने वाले मार्ग पर थावे नाम का एक स्थान है, जहां मां थावेवाली मां एक प्राचीन मंदिर में विराजती हैं।

    मां थावे वाली को सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारते हैं। ऐसे तो सालों भर यहां भक्त आते हैं लेकिन शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है।

    मान्यता है कि यहां मां अपने भक्त रहषु के बुलावे पर असम के कमाख्या स्थान से चलकर यहां पहुंची थी। कहा जाता है कि मां कमाख्या से चलकर कोलकता (काली के रूप में दक्षिणेश्वर स्थन में प्रतिष्ठित), पटना (पटन देवी), आमी (छपरा जिला में मां दुर्गा का एक प्रसिद्ध स्थान) होते हुए थावे पहुंची थी और रहषु के मस्तक को विभाजित करते हुए साक्षात दर्शन दी थी।

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  82. देश के 52 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के पीछे एक प्राचीन कहानी है।

    जनश्रुतियों के मुताबिक राजा मनन सिंह हथुआ के राजा थे। वे अपने आपको मां दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानते थे। गर्व होने के कारण अपने सामने वे किसी को भी मां का भक्त नहीं मानते थे। इसी क्रम में राज्य में अकाल पड़ गया और लोग खाने को तरसने लगे। थावे में कमाख्या देवी मां का एक सच्चा भक्त रहषु रहता था। कथा के अनुसार रहषु मां की कृपा से दिन में घास काटता और रात को उसी से अन्न निकल जाता था। जिस कारण वहां के लोगों को अन्न मिलने लगा। लेकिन राजा को इसका विश्वास नहीं हुआ।

    राजा ने रहषु को ढ़ोंगी बताते हुए मां को बुलाने को कहा नहीं तो सजा देने की बात की। रहषु ने कई बार राजा से प्रार्थना की अगर मां यहां आएंगी तो राज्य बर्बाद हो जाएगा, लेकिन राजा यह सुनने को तैयार नहीं थे। रहषु के प्रार्थना पर मां कोलकता, पटना और आमी होते हुए यहां पहुंची राजा के सभी भवन गिर गए और राजा की मौत हो गई।

    पौराणिक कथाओं के मुताबिक, मां यहां जैसे ही प्रकट हुईं यहां पर आकाशीय बिजली चमकी और राजा मननसिंह और उसके पूरे राजपाट की तबाही शुरू हो गई। रहषु के सिर को फाड़ कर उसमें से मां का कंगन और हाथ का हिस्सा बाहर निकला। इससे रहषु को जहां मुक्ति मिल गई। वहीं देवी मां की इसी थावे जंगल में स्थापना कर दी गई। तभी से इस मंदिर में मां की पूजा शुरू हो गई। थावे मंदिर के थोड़ी दूरी पर ही उनके भक्त रहषु का भी मंदिर है, जहां बाघ के गले में सांप की रस्सी बंधी हुई है।

    मान्यता है कि जो लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं वे रहषु का भी मंदिर जरूर जाते हैं नहीं तो उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। इसी मंदिर के पास आज भी मनन सिंह के भवनों का खंडहर मौजूद है।

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  83. मंदिर के आसपास के लोगों के अनुसार यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य के पूर्व और उसके पूर्ण हो जाने के बाद यहां आना नहीं भूलते। मां मंदिर का गर्भ गृह काफी पुराना है। तीन तरफ से जंगलों से घिरे इस मंदिर में आज तक कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

    मंदिर के मुख्य पुजारी संजय पांडेय बताते हैं कि नवरात्र के सप्तमी की रात को मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन मंदिर में भक्त भारी संख्या में पहुंचते हैं। बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल के अलावे यहां नेपाल के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यहां मां के भक्त प्रसाद के रूप में नारियल, पेड़ा और चुनरी चढ़ाते हैं।

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  84. जब संकट कोई आए, तू ले मईया का नाम, तेरे पुरण होंगे काम,

    जब व्याकुल मन घबराए, तू ले मैया का नाम, तेरे पूर्ण होंगे काम।।
    महा अष्टमी 2022 की शुभकामनाएं।

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  85. 3 अक्टूबर को नवरात्रि का आठवां दिन है। अष्ठमी के दिन मां गौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी पूजा के दिन कन्या भी खिलाया जाता है। महागौरी की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है

    देश में इन दिनों नवरात्रि पर्व की धूम मची हुई है। जगह-जगह पर माता रानी का दरबार सजा हुआ है। अपनी मन की मुराद लेकर भक्तगण मां दुर्गा के दर पर हजारों की तादाद में पहुंच रहे हैं। नवरात्रि में उपवास और जगराता के अलावा कन्या पूजन का भी काफी महत्व है। अष्टमी और नवमी को कन्या खिलाने से मां जगदम्बा प्रसन्न होती है और हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।

    मां गौरी का रूप
    माता गौरी का रूप बेहद कोमल और श्वेत है। उनकी चार भुजाएं है और उन्होंने सफेद वस्त्र धारण किया हुआ है। मां गौरी के एक हाथ में डमरू और दूसरे में त्रिशूल है। उनकी सवारी बैल है। महागौरी को शिवा भी कहा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, सफेद रंग मां गौरी को बेहद पसंद हैं

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  86. मां महागौरी मंत्र का करें जाप
    1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

    2. सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते।

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  87. कुमकुम भरे कदमों से आए मां दुर्गा आपके द्वार।
    सुख संपत्ति मिले आपको अपार आपके लिए शुभ हो नवरात्रि का त्योहार।
    मेरी ओर से महाष्टमी की शुभकामनाएं करें स्वीकार।

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  88. देवी सरस्वती का हाथ हो माँ गौरी का साथ हो, भगवान गणेश का निवास हो,
    और माँ दुर्गा के आशीर्वाद से आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो
    दुर्गा अष्टमी 2022 की बधाई…

    Reply
  89. आज का दिन मां दुर्गा के नाम है,
    महा अष्टमी के शुभ अवसर पर देवी को प्रणाम है।

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